भारत के नए कानूनी दांव से क्यों कांप रहा है आतंकी हाफिज सईद

भारत के नए कानूनी दांव से क्यों कांप रहा है आतंकी हाफिज सईद

भारत विरोधी आतंक के सबसे बड़े चेहरों में शुमार हाफिज सईद पर अब कानूनी फंदा ऐसा कस रहा है कि उसकी नींद उड़ना लाजिमी है. दशकों तक पाकिस्तान की सरपरस्ती में सुरक्षित महसूस करने वाला यह शख्स अब भारतीय अदालतों के नए और सख्त प्रावधानों के दायरे में आ चुका है.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और अदालतों ने एक ऐसा दांव चल दिया है, जिससे सीमा पार बैठे इस आतंकी के पास छिपने की जगह कम होती जा रही है. आइए जानते हैं कि इस बार भारत की रणनीति में ऐसा क्या खास है जो इस खूंखार आतंकवादी की रातों की नींद उड़ा रहा है. For a more detailed analysis into similar topics, we suggest: this related article.

गैर-मौजूदगी में मुकदमे का नया कानूनी हथियार

मुंबई के भयावह 26/11 हमलों की कसक आज भी देश के जेहन में ताजा है. इस मामले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल लश्कर-ए-तैयबा का सरगना हाफिज सईद अब तक पाकिस्तान में बेखौफ बैठा हुआ था. लेकिन अब नियम बदल चुके हैं.

भारत ने अपनी आपराधिक न्याय प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 356 का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. इसके तहत किसी भी भगोडिया आरोपी की गैर-मौजूदगी यानी 'ट्रायल इन एब्सेंटिया' में औपचारिक मुकदमा चलाने का रास्ता साफ हो गया है. For further background on this topic, detailed reporting can also be found at BBC News.

मतलब साफ है. अब अदालतें सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं. हाफिज सईद की शारीरिक मौजूदगी के बिना भी भारतीय अदालतें सबूत दर्ज करेंगी और कानूनी प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाएंगी. अगर एक बार इस प्रक्रिया के तहत सजा तय हो जाती है, तो भविष्य में कभी भी आरोपी के हाथ आने पर उसे बिना किसी नए ट्रायल के सीधा जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया जाएगा.

पहलगाम हमले से लेकर पुराने जख्मों का हिसाब

हाफिज सईद का काला चिट्ठा सिर्फ 26 तक सीमित नहीं है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए खौफनाक आतंकी हमले की चार्जशीट में भी हाफिज सईद और उसके आतंकी संगठनों को मुख्य आरोपी बनाया है.

इस मामले में भी भारतीय अदालतों ने कड़ा रुख अपनाते हुए गैर-जमानती वारंट और समन जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. भारत सरकार ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी शिकंजा कसते हुए पाकिस्तान के सामने उसका प्रत्यार्पण यानी प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग मजबूती से रखी है. हालांकि पाकिस्तान हमेशा की तरह बहाने बनाता रहा है, पर इस बार कानूनी और कूटनीतिक दबाव का स्तर पूरी तरह अलग है.

पाकिस्तान के भीतर क्यों बढ़ गई है बेचैनी

सीमा पार से आ रही रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत के इन सख्त कदमों के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हाफिज सईद की सुरक्षा को बेहद कड़ा कर दिया है. उसके चारों ओर सुरक्षाबलों का पहरा बढ़ा दिया गया है और उससे मिलने वाले हर शख्स की कड़ी छानबीन हो रही है.

इस खौफ की एक बड़ी वजह यह भी है कि पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारत के कई वांछित दुश्मन संदेहास्पद हालातों में मारे जा चुके हैं. लश्कर के कई बड़े कमांडर आपसी रंजिश या अज्ञात हमलों का शिकार बने हैं. ऐसे माहौल में जब भारत ने उसकी गैर-मौजूदगी में कानूनी मुकदमा और वारंट का शिकंजा कसा है, तो सईद और उसके आकाओं की बेचैनी बढ़ना लाजिमी है.

कानून की यह लंबी पहुंच यह साफ जताती है कि भारतीय न्याय व्यवस्था अब अपराधियों को अनिश्चित काल तक भागने का मौका देने के मूड में नहीं है. दूरी और सरहदें अब इंसाफ के रास्ते में रुकावट नहीं बनेंगी.

HS

Hannah Scott

Hannah Scott is passionate about using journalism as a tool for positive change, focusing on stories that matter to communities and society.